बवासीर का इलाज – Bawaseer ka ilaj ramdev baba dwara – Hemorrhoids Treatment

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बवासीर का इलाज – Bawaseer ka ilaj ramdev baba dwara – Hemorrhoids Treatment

Bawaseer ka ilaj ramdev baba dwara – Hemorrhoids Treatment – भारत में बढ़ती जनसंख्या के साथ बीमारी भी बढे मात्रा में अपने पैर जमा रही है| इन्ही बीमारी में से 1 बवासीर की बीमारी है जिसे Hemorrhoids के नाम से भी जाना जाता है| Hemorrhoids का इलाज सामन्यता प्रारंभिक अवस्था में आसानी से हो जाता है| यह रोग पेठ की बीमारी से ही जन्म लेता है|

bawaseer की बीमारी मल त्यागने के मार्ग में होती है| इससे मल त्यागने में बहुत तकलीफ होती है| दर्द इतना भयानक होता है की रोगी भोजन करना छोड़ देता है|

बवासीर के प्रकार – Types of Homorrhoids

अयुर्वेद्चार्यो के अनुसार Hemorrhoids 2 तरह के होते है| अंतर्वली और बहिर्वली|

1. अंतर्वली बवासीर –
इस Hemorrhoids में मांसांकुर (मस्से) गुदा के अंदर निकलते है| इसलिए यह आसानी से समझ नहीं आता| जब रोगी को मल के साथ खून दिखाई देने लगता है तब इसकी पहचान होती है|

2. बहिर्वली बवासीर –
इस Hemorrhoids में मांसांकुर (मस्से) गुदा के बहार दिखाई देते है|

परिस्थितियों के अनुसार भी अर्श 2 प्रकार केहोते है –

1. बादी बवासीर –
शुष्क Hemorrhoids को बादी बवासीर कहा जाता है| क्योकि मस्से दिखाई नहीं देने के कारण रोगी को भी पता नहीं चलता|

2. खूनी बवासीर –
स्त्रावी Hemorrhoids को खूनी बवासीर कहा जाता है| और रक्तस्त्राव की अधिकता से रोगी को स्वंय पता चल जाता है|

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बवासीर का इलाज – bawaseer ka ilaj

बवासीर रोग में सर्वप्रथम कब्ज को नष्ट करना आवश्यक है| कब्ज के चलते मस्से नष्ट नहीं हो पाते|

1. कब्ज होने पर अजवायन और विडलवण को मट्ठे में डालकर रोगी को देने से मल का निष्कासन सरलता से हो जाता है|

कब्ज होने पर इच्छाभेदी रस की 1 गोली रात्रि में शीतल जल से सेवन कराने पर सुबह सरलता से शौच होती है| इच्छाभेदी रस के सेवन के बाद जीतनी बार शीतल जल पिलाया जाएगा रोगी को उतनी बार दस्त होगा| गर्म जल पिलाने से दस्त बंद हो जाते है|

2. अर्शकुठार रस 2 ग्राम मात्रा में मट्ठे के साथ सुबह और शाम को सेवन करने से बवासीर कुछ सप्ताह में ठीक हो जाता है|

3. गौमूत्र में रात्रि में रखी हरडो को सुबह गुड के साथ चबाकर खाने से बवासीर नष्ट हो जाता है\

4. कटहल के अंदर का गुदा, मुसलीक्षार, गोरोचन, जल के साथ पीसकर उसका रस निकाल ले| इस रस को मस्से पर लैप करने से लाभ होता है|

5. नारियल की दाडी (भूरे रेशे) को जलाकर राख बनाकर छानकर रख ले| 3-3 ग्राम नारियल की यह भस्म सुबह-दोपहर छाछ के साथ और शाम को गुनगुने जल के साथ सेवन करे| एक बार लेने से ही बवासीर में आशातीत लाभ होता है| यह मासिकधर्म में अति रक्त स्त्राव और श्वेतप्रदर में भी लाभप्रद है|

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ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

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